रविवार, 23 फ़रवरी 2020

Ghost Of Love

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हेलो दोस्तों आज मई आप लगों के लिए कहानी का अंतिम और तीसरा भाग लेकर आया हूँ चलिए सुरु करते है 
तो गोविन्द राधा से कहता है की नहीं मैं कभी नहीं मिला हूँ  इसपर राधा कहती है की क्या वह मिलना चाहता है गोविन्द ने कहा मुझे नहीं पता उसी पल गोविन्द राधा की तरफ देखता है तो राधा वह से गायब होती है गोविन्द राधा राधा आवाज लगता है ल्र्किन राधा का वह कहीं कोई आता पता नहीं होता है अचानक गोविन्द को राधा की आवाज पीछे से सुनाई देती है गोविन्द जैसे ही पीछे की और मुड़ता है तो वो देख कर दांग रहे जाता है वहां राधा ही कड़ी थी लेकिन अब वो कोई खूबसूरत पारी नहीं बल्कि नर्क से आई हुई कोई पिशाचनी लग रही थी उसका खूबसूरत चहेरा पूरी तरहं गाला हुआ था उसके सरीर पर एक भी कपडा नहीं था लेकिन पूरा शरीर फटा हुआ था उसके हाँथ पूरी तरह से भयानक लग रहे थे उसकी आँखे जैसे आग उगल रही हों ये सब कुछ देख कर गोविन्द एक पल के लिए थोड़ा दर गया लेकिन दूसरे ही पल गोविन्द ने खुद को सँभालते हुए कहा की पहले वाली राधा ज्यादा खूबसूरत थी तो इसपर वो भयानक राधा बोली की उसे मज़ाक सूझ रहा है यहाँ मई तुझे मारने जा रही हूँ  इसपर गोविन्द बोला की नहीं तुम मुझे नहीं मार सकती हो ये सुनकर उस भयं राधा को बहोत गुस्सा आ जाता है और वो गोविन्द की तरफ चीखते हुए आती है लेकिन गोविन्द के पास एते ही वो रुकल जाती है और गोविन्द उसे देख कर पूंछता है की क्यों तुम रूक क्यों गई


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आओ आगे बढ़ो में मुझे मार दो अचानक राधा पीछे की और हटती है और गोविन्द से पूंछती है की उसने ऐसा कैसे किया गोविन्द ने कहा  कैसे तो राधा ने कहा जब वो जंगल में पेंड के पीछे पूरी तरह से निर्वस्त्र कड़ी थी तो उसने उसे अपनी शॉल क्यों दी उसका फायदा क्यों नहीं उठाने की कोशिस की तो गोविन्द ने कहा की किसी मजबूर लड़की का फायदा उसे उठाना नहीं आता और अगर वो उसका फायदा उठा लेता तो उसमे और उन गीदड़ों में क्या अंतर रहे जाता जो किसी मजूर जानवर का शिकार करते है वो भी झुण्ड के साथ असली इंसान और असली मर्द वही है 



जो लड़की इज्जत कर सके उसकी मजबूरी में उसके साथ खड़ा होकर उसका सहारा बन सके नाकि उसका फायदा उठाये और हां मई पहले से ही जनता था की तुम कौन हो तो ये सुनकर राधा चौंक गई और पुछा की अगर तम जानते थे की मैं काओं हूँ तो तमभागे क्यों नहीं मेरे साथ क्यों आये तो गोविन्द ने कहा की मैंने तम्हे बताया था की हर किसी का एक अच्छा भाग जरूर होता है फिर वो चैन कोई भी हो मैं तम्हारी बुराई तो जनता था लेकिन तम्हारा अच्छा भाग भी जानना चाहता था इस लिए मैं तम्हारे साथ आया और मैंने कहा था ना की तम मुझे नहीं मार सकती क्यों की अब मैं तुम्हरा अच्छा भाग जान चूका हूँ तुमने किसी वजह से ये बुराई चुनी थी क्यों मैं सच बोल रहा हूँ  ना तो राधा  ये सुन कर बहोत रोने लगी और कहने लगी जैसे तम हो खास ऐसे ही वो लोग होते जिन्होंने मेरा बलात्त्कर करके मुझे जिंन्दा ही उस तालाब में फेंक दिया मरने के लिए रोते रोते राधा अपने उसी सुन्दर रूप में वापस लौट आयी सायद अब वो और बुरी नहीं रहना चैती थी तो गोविन्द ने उससे पूंछा की क्या हुआ था राधा गोविन्द को पूरी बात कहने लगी की आज से ६० साल पहले वो पास के गांव में रहती थी एक दिन वो इस तालाब में पानी भरने के लिए आयी तो कुछ अंग्रेजों ने उसे पकड़ लिया और उसे बुरी तरहं मारा और उसका बलात्त्कर किया सारा दिन उसे वो नोचते रहे और गाओं के कुछ लोग जो वहां से निकल रहे थे 


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उन्होंने भी उसकी मदत नहीं की बल्कि अंग्रेजों के दर से वो वहां खड़े होकर तमाशा देखते रहे फिर आखरी में उसे एक पत्थर से बांध कर इसी तालाब में फेंक दिया तब मई जिंन्दा थी मैं सभी से मुझे बचने की भीएक मांगती रही लेकिन कोई आगे नहीं आया और मैं घुट घुट कर मर गई तभी से मैंने कसम खा ली की अब किसी भी मर्द को मैं जिंन्दा नहीं छोडूंगी और तब से जोभी  आदमी यहाँ से रात के वक्त निकलता है मई उसे ऐसे ही बिना कपड़ों के मिलती जिसके मन में भी मुझे देख कर हवस जगती मैं उसे इसी तालाब में डूबा कर मर देती हु लेकिन आज पहेली बार मुझे तुम मिले तुम्हारे डिल में मुझे मेरे लिए हवस नहीं बल्कि सम्मान दिखाई दिया और मैं तुम्हे मार नहीं पाई तो गोविन्द ने उसका हाँथ पकड़ते हुए कहा की ये देखो इस हाँथ की साडी उंगलियां बराबर नहीं है उसी तरह हर इंसान भी एक जैसा नहीं होता है और बिना कपड़ों के अगर कोई लड़की किसी भी आदमी को दिखेगी तो उसके मन में थोड़ी सी तो गलत भावनाये आना स्वाभाविक है लेकिन अगर वो इंसान अपनी उन्भावनाओं को बहार लता है तो वो गलत है तब तम उसको सजा दो ऐसे ही किसी को भी मारना सही नहीं है ये सुन कर राधा रोने लगी और गोविन्द के गले लग गई और गोविन्द से बोली क्या वो रोज उससे मिलने यहाँ आ सकता है अगर उसे कोई दिक्कत न हो तो तो गोविन्द बोलै मई वादा करता हूँ की मई रोज उससे मिलने यहाँ आऊंगा लेकिन अब वो किसी को मारेगी नहीं तो राधा ने वादा किया की अब वो कसी को नहीं मारेगी गोविन्द बोलै की अब मुझे चना चाहिए मुझे दूसरे गांव जाकर वैद्य को लाना है तो राधा बोली की वैद्य वह पहुंच चुके है तम आज मेरे साथ यही रुको तो गोविन्द ने मुस्करा कर कहा क्यों नहीं दोनों वही एक पेंड के नीचे बैठ गई और बात करने लगे रात कब बीत गई दोनों को पता ही नहीं चला सुबह का सूरज भी उगने लगा तो गोविन्द बोलै क्या तम दिन में भी यही रहती हो तो राधा बोली नहीं मैं दिन में पानी के अंदर रहती हूँ इतना कहते ही राधा चौंका कर आसमान में देखती है और कहती है की ये कैसे हो सकता है वो दिन में बहार है और उसे कोई दिक्कत भी नहीं हो रही है तभी अचानक गांव की एक लड़की वह तालाब से पानी भरने आई हुई होती है वो गोविन्द देखती है


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उसके पास आती है और पूंछती है की गोविन्द भैया आप यहाँ क्या कर रहे हो गांव में सभी लोग आपका इंतज़ार कर रहे है सभी परेशान है की आपका क्या हुआ होगा और ये आपके साथ काओं है क्या हमारी भाभी है गोविन्द और राधा ये सुनकर बहोत चौंक जाते है लेकिन गोविन्द उस लड़की से कहता है की उसे दूसरे गांव हकीम नहीं मिले तो वो वापस आ रहा था थकन की वजह से वो यही बैठ कर आराम करने लगा तम चलो मई अत हूँ तो वो लड़की वहां से चली जाती है तब राधा पूंछती है की क्या वह सभी को दिखाई दे रही है तो गोविन्द कहता है सायद अब वो बदल गई है अब वो पुराणी बुरी वाली राधा नहीं है अब वो अच्छी राधा है तो राधा गोविन्द से कहती है की अब वो कहाँ जाएगी क्या अब उसे फिरसे पानी में जाके रहना होगा तो गोविन्द राधा से कहता है की अगर उसे कोई दिक्कत न हो तो वो गोविन्द के साथ उसके घर पर रहने चल सकती है और राधा गोविन्द के साथ उसके घर रहने चले जाते है और पूरा जीवन साथ में ही बिता देता है जब गोविन्द की आखरी में मौत होती है तो राधा को भी मुक्क्ती मिल जाती है 

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